-अब्दुल रशीद
बीते कुछ सालो में भारतीय समाज की गंगा जमुनी तहज़ीब कि रंगत में कुछ बदलाव सा नज़र आरहा है। अचानक भीड़ इकठ्ठा हो कर हिंसक हो जाती है और एक अनजान इंसान को क्रूरतापूर्वक मार देती है।कौन है जो सोशल मिडिया पर अफवाह फैला कर भीड़ को हिंसक बना रही है?
यदि लिंचिंग के मामले को गौर से देखा जाए तो ज़्यादातर मामलों में सोशल मीडिया और 'बाहरी व्यक्ति' के बीच दो चीजें आम हैं, वो अलग भाषा बोल रहा है, या उसका पहनावा वेश भूषा खान पान अलग है, भीड़ का शिकार हुए हैं।
लेकिन इन कारणों में 'विशेष पहचान', “डर” और “आधुनिक संचार प्रौद्योगिकी” के मिलन से यह और ते़जी से फैला है। 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद शुरु हुई लिंचिंग पिछले साल अपने चरम पर पहुंच गई थी। पिछले चार वर्षों में गाय संरक्षण और गोमांस खाने के नाम पर भीड़ के हमलों और लिंचिंग की 78 घटनाएं हुईं, सामूहिक बर्बरता की अभिव्यक्ति में, इन हमलों और हत्याओं में 29 लोगों की जान चली गई और 273 घायल हो गए, पीड़ितों में दो तिहाई से अधिक मुसलमान थे और शेष ज्यादातर दलित थे। क्या राजनैतिक लाभ के लिए दशकों से एक विशेष समुदाय के खिलाफ घृणित प्रचार और तथाकथित 'गाय संरक्षण' की भावना का अचानक विस्फोट इन हमलों को बढ़ाने के लिए एक जानबूझकर किया गया प्रयास था?
ऐसे मामलो में मौजूदा सरकार ने कोई ठोस कदम उठाया हो और उसका असर हुआ हो ऐसा नज़र आता नहीं, उलटे उनके मंत्री ऐसे हत्यारों को माला पहना कर महिमामंडित कर बचाव करते जरुर दिखते रहें। हां प्रधानमंत्री ने ऐसे मामलों में वक्तव्य दिया,लेकिन देश के सबसे मजबूत प्रधानमंत्री की बात का ऐसे मामलों में असर न करना खुद में एक अनसुलझी पहेली हैं?
यही नहीं सोशल मिडिया पर देश के विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को एक भारतीय दंपति के पासपोर्ट मामले में अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए ट्रोल किया गया,और उनकी सरकार के मंत्रियों ने मौन धारण कर लिए जबकि मीडया रिपोर्ट से यह पता चलता है की उनकी सरकार के कई मंत्री ऐसे अभद्र भाषी सोशल मिडिया के जांबाजो को खुद फ़ॉलो करते है।
सुषमा स्वराज ने खुद ऐसे अभद्र टिप्पणी कर्ताओं को जवाब दिया जो काफ़ी नहीं लगता,जब कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी के साथ अभद्रता करने वाला महज़ 48 घंटे में पकड़ा जा सकता है तो आप विदेश मंत्री है,आप चाहे तो क्या कार्यवाही नहीं हो सकता? आखिर ऐसी कौन सी राजनैतिक मज़बूरी है जिसके कारण देश के विदेश मंत्री के साथ अभद्रता करने वालों पर कार्यवाही नहीं किया जाता?
सत्ता के लिए राजनीति कीजिए लेकिन अभिव्यक्ति के नाम पर अभद्रता करने वालों पे करवाई से परहेज और हत्या के दोषियों का महिमामंडन सभ्य समाज और लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं।

सिंगरौली मध्यप्रदेश
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