सिविल सेवा परीक्षा 2017(आईएएस की परीक्षा) में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली अनु कुमारी का परिणाम कई दृष्टियों से अभूतपूर्व है।9 वर्ष कॉरपोरेट क्षेत्र में कार्य करने के बाद विवाहित जीवन में प्रवेश तथा 4 वर्ष के बच्चे की माँ होने के बावजूद,जब हर कोई अपने जीवन के भविष्य के किसी नवीन सपने के बारे में सोचना छोड़ देने लगते हैं,तब उन्होंने न केवल 1 लाख 60 हजार प्रति माह के निजी क्षेत्र की नौकरी छोड़ सिविल सेवा की तैयारी प्रारंभ की,अपितु उन्हें 4 वर्ष के बच्चे से दूर रहना पड़ा (किसी माँ के लिए यह निर्णय कितना कठिन होता है,इसका केवल अंदाजा लगाया जा सकता है)।इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद देश के सबसे कठिन एवं प्रतिष्ठित परीक्षा में उनके द्वारा द्वितीय रैंक लाना अवश्य ही महिला सशक्तीकरण का ज्वलंत उदाहरण है।उनके इस यात्रा को इससे भी समझा जा सकता है कि उनके जन्म पर भी उनके घर में मातम का माहौल था और केवल उनके पिताजी ही खुश थे,परंतु आज वे संपूर्ण देश की गौरव हैं।वे अभी न केवल युवक एवं युवतियों की प्रेरणास्रोत हैं,अपितु अनेकों गृहणियों की भी प्रेरणास्रोत हैं,जो अपने जीवन के लिए अनेक सपने संजोए हुए हैं।मैं यूपीएससी उम्मीदवारों को बताता रहता हूँ कि कम सामग्री तथा बार-बार उनकी पुनरावृत्ति ही सफलता की ओर ले जाती है।इस रणनीति का उन्होंने शानदार क्रियान्वयन किया है,जो उनके परिणाम से भी स्पष्टतः प्रतिबिंबित हो रहा है।उनसे अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ राहुल लाल ने उनके हरियाणा सोनीपत स्थित निवास में विस्तृत बातचीत की है।उनके इस घर को अगर वर्तमान में महिला सशक्तीकरण का प्रेरणा केंद्र कहा जाए,तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।प्रस्तुत है,उनके साथ हुए विस्तृत बातचीत के प्रमुख अंश..
राहुल लाल- आईएएस की तैयारी पहली बार इच्छा कैसे उत्पन्न हुई?आज जब युवा पीढ़ी प्राय:जोखिम लेने से दूर रहती है,ऐसे में आपने आपने भारी-भरकम पैकेज वाली नौकरी छोड़कर आईएएस की तैयारी का निर्णय कैसे लिया?
अनु कुमारी--मैंने कॉरपोरेट सेक्टर में 9 वर्ष सेवा प्रदान की,लेकिन एक समय के बाद मुझे इसमें संतुष्टि नहीं मिल रही थी।मुझे लगा कि इस जॉब में पैसे तो मिलेंगे, परंतु समाज सेवा का संतुष्टि का नहीं।मेरे मामाजी एवं भाई ने मुझे इस तैयारी के लिए प्रोत्साहित किया।हालांकि जब जॉब छोड़ रही थी,तो एक आय का स्रोत छूट रहा थख।ऐसे में मुझे लग रहा था कि अगर आईएएस की परीक्षा में सफलता नहीं मिली,तो मैं क्या करूँगी?इसके लिए मैंने अध्यापन के विकल्प को तैयार रखा था।मैं जब पढ़ाती या समझाती हूँ तो बच्चों को भी आसानी से समझ में आ जाती हैं।जहाँ तक वित्तीय मामलों की बात है,तो मेरे पापा एवं मामा जी ने मुझे आश्वस्त किया।इसके अतिरिक्त मेरे पुराने बचत भी थे।साथ ही मेरे दोनों भाई भी सदैव मेरा पूर्ण सहयोग करते रहे।
राहुल लाल--आप एक 4 वर्षीय बच्चे की माँ भी हैं,ऐसे में तैयारी एवं छात्र जीवन के बीच संतुलन कैसे बनाई?हम सभी जानते हैं कि यह परीक्षा देश के कठिनतम परीक्षाओं में से एक है।ऐसे में आपके लिए यह भी चुनौती पूर्ण रहा होगा?
अनु कुमारी- मैंने इस दौरान पढ़ाई को सबसे ज्यादा वरीयता दी।अपने बेटे को माँ के पास छोड़ दिया तथा मौसी के घर तैयारी के लिए चली गई।मौसी ने मेरा पूर्ण ध्यान रखा,जिससे मैं अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगा पाई।एक तरह से परिवार के पूर्ण समर्थन के कारण यह सब संभव हो पाया है।मैं इस तैयारी के दौरान मातृत्व की भूमिका से दूर रही,लेकिन मेरी माँ ने इस भूमिका का निर्वहन श्रेष्ठतम ढंग से किया।
राहुल लाल- सरकार की एक बड़ी मुहिम
"बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" है और आपने इस मुहिम ज्वलंत रूप से प्रमाणित कर दिया।पितृसत्तात्मक दबावों के बीच आप अपनी अब तक के इस यात्रा को किस रुप में देखती हैं?
अनु कुमारी---मैं बहुत खुश हूँ आज जब "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ"की मुहिम चल रही है,ऐसे में भगवान ने मुझे भी लोगों को प्रेरणा देने का साधन बनाया है।जब मेरा जन्म हुआ था,तब मैं अपने घर में दूसरी बेटी थी।इस कारण मेरे घर में भी मातम जैसा माहौल था।मेरे पिता जी हरियाणा से हैं,उसके बावजूद जन्म के समय केवल मेरे पापा ही खुश ही थे,जिन्होंने कहा कि घर में दूसरी लक्ष्मी आई है।मेरे पिताजी के शुरुआत से ही उदार विचार रहे हैं।उन्होंने बचपन से लेकर अब तक मेरी पढ़ाई में कोई कमी नहीं रहने दी।6-7 वीं तक उन्होंने ही मुझे घर पर पढ़ाया।हाँ,महिला सुरक्षा की दृष्टि से समय से जाने और आने के लिए कहा जाता था।लेकिन महिला होने के कारण मेरे ऊपर कभी कोई प्रतिबंध आरोपित नहीं किया गया और न ही घर वालों ने किसी तरीके से कोई भेदभाव ही किया।परिवार, स्कूल,कॉलेज में भी माहौल काफी सकारात्मक था।
राहुल लाल--देश भर की युवक-युवतियाँ आपसे प्रेरणा ग्रहण कर रही हैं।इसलिए मैं आपके हरियाणा सोनीपत स्थित इस घर को प्रेरणास्थली कह रहा हूँँ और मैं इस समय प्रेरणास्थली में बैठा हूँ।ऐसे में देश भर में जो युवतियाँ आपको आशा के साथ देख रही हैं,उन्हें क्या कहना चाहेंगी?
उत्तर - सर,बहुत बहुत धन्यवाद।उन सभी को यही कहना चाहूँगी,कि आप अगर कोई भी ऐसा कदम उठाना चाह रही हैं,जहाँ आप अपनी आशा,सपना इत्यादि को पूर्ण करना चाहती हैं,तो मेरा साथ आपको भरपूर रूप से रहेगा।मेरे पास बहुत सी लड़कियों के फोन आ रहे हैं,उनमें एक 5 वर्षीय बच्चे की माँ भी है।वह भी मेरे स्टोरी से प्रेरित हुई हैं।मैं इन सभी से कहना चाहूँगी कि अगर आपके पास जज्बा है,तो आपको कोई नहीं रोक सकता।मैं आपके साथ रणनीति साझा करूँगी या फिर प्रोत्साहन के रूप में अन्य सहयोग भी।
राहुल लाल- जो माता-पिता अपने बच्चों के आशा के किरण के रूप में आपको देख रही हैं,उन्ह़े आप क्या कहेंगी?
अनु कुमारी- -सभी माता-पिता से कहना चाहूँगा कि कि आपकी बेटियाँ भी आपके गर्व का कारण बन सकती हैं,इसलिए उन्हें भ्रूण हत्या मत करें,न ही उनकी इच्छाओं को दबाएँ।उन्हें उतना ही प्यार सम्मान दीजिए, जितना आप अपने बेटों को देते हैं,ताकि कल आगे चलकर वह भी साक्षी मलिक,मानुषी छिल्लर की तरह गर्व कर सके।
राहुल लाल- और एक ज्वलंत उदाहरण सामने ही है।आपके जन्म के समय भी दुख का माहौल था,लेकिन आज न केवल देश अपितु विश्व में जहाँ कहीं भी भारतीय मूल के लोग हैं,वहाँ आपको लेकर खुशी का माहौल बना हुआ है।यूपीएससी में पहले भी द्वितीय रैंक लोगों को आते रहे हैं,लेकिन आपने जिन विपरीत परिस्थितियों में यह सफलता पाई उसके लिए आपको पुनः बधाई।अब बात करते हैं परीक्षा के तैयारी के संदर्भ में।
मैं सदैव यूपीएससी अभ्यर्थियों को कहता हूँ कि कम सामग्री तथा बार-बार पुनरावृत्ति ही सफलता की ओर ले जाता है।इस बारे में आपके क्या विचार हैं?
अनु कुमारी--- सर,बिल्कुल सही।मैंने इसी रणनीति को क्रियान्वित किया।चाहे प्रारंभिक परीक्षा हो या मुख्य परीक्षा।कम तथा उच्चस्तरीय प्रमाणित सामग्री जिसका रिविजन बार-बार आसानी से हो सके।
राहुल लाल- यूपीएससी के त्रिस्तरीय परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा यद्यपि प्रथम चरण है,परंतु किसी चुनौती से कम नहीं है।इस बारे में आपका क्या कहना है?
अनु कुमारी- जी सर,आप बिलकुल सही कह रहे हैं।लाखों छात्र प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होते हैं,लेकिन कुछ हजार ही चयनित होते हैं।ऐसे में इस परीक्षा की तैयारी भी पूरी गंभीरता से होनी चाहिए।मैंने प्रथम प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा में लगभग 1.5 माह का समय दिया था तथा असफल रही थी।ऐसे में प्रारंभिक परीक्षा को लेकर भी गंभीरता की आवश्यकता है।
राहुल लाल-- सिविल की तैयारी में ज्ञान छात्र काफी अर्जित कर लेते हैं,लेकिन मुख्य परीक्षा में लेखन अभ्यास बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।इस मामले में आप क्या कहना चाहेंगी, क्योंकि परीक्षा हॉल में समय प्रबंधन के साथ उच्चस्तरीय लेखन की चुनौती होती है?
अनु कुमारी-- सर आप बिल्कुल सही कह रहे हैं।ज्ञान आप चाहे जितना भी अर्जित कर लें,अगर आप उसे सही से अभिव्यक्त नहीं कर पाएँगे, तो सफलता नहीं मिलेगी।इसलिए मैंने लेखन अभ्यास काफी ज्यादा किया।मैं प्रत्येक दिन अर्थात बिना एक भी दिन छोड़े उत्तर लेखन अवश्य करती थी।मैं प्रत्येक दिन 8 प्रश्नों के उत्तर अवश्य लिखा करती थी।पहले एक प्रश्न के उत्तर लिखने में 15-20 मिनट लगते थे,लेकिन बाद में 7 मिनट हो गए।
राहुल लाल- इसलिए सभी लोग जो यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं,वे इस मामले पर अवश्य ध्यान दें।15 मिनट से 7 मिनट प्रति प्रश्न के कारण ही परीक्षा हॉल में इनका प्रश्न छूटा नहींं, अन्यथा परीक्षा में प्रश्न ही छूट जाते हैं।इसलिए इस प्रश्न अभ्यास को समझा जा सकता है।अभी इंटरनेट युग में लोग सूचनाओं के भारी प्रवाह में होते हैं।ऐसे में आपका क्या सुझाव हैं?
अनु कुमारी-- आप बिल्कुल सही कह रहे हैं।सूचनाओं के दबाव से बचने के लिए आवश्यक है कि काफी सावधानी से महत्वपूर्ण वेबसाइट का चयन करना।इस समय आईएएस को समर्पित ही काफी वेबसाइट हैं,ऐसे में छात्र शुरुआत में थोड़ा ध्यान देकर किसी एक अच्छे वेबसाइट का चयन कर लें,अन्यथा आप सूचनाओं के अंबार में डूब जाएंगे।इसके अतिरिक्त करेंट अफेयर्स के महत्वपूर्ण चीजें के छोटे-छोटे नोट्स बनाकर पढ़ना चाहिए।प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए ही आर्थिक समीक्षा एवं बजट के शॉर्ट नोट्स भी छात्रों को बना लेना चाहिए, जिसका अंतिम समय में समुचित रिवीजन हो सके।
राहुल लाल---इस तरह के परीक्षा में परीक्षार्थी के कठोर परिश्रम के अतिरिक्त घर वालों की कठोर तपस्या जैसे समर्पण और समर्थन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।इस पर क्या कहना चाहेंगी?
अनु कुमारी--सर, मैं आपसे पूर्णतः सहमत हूँँ।जब मैं तैयारी कर रही थी,तो मेरे माँ,पिता जी,मामा जी,मौसी जी तथा मेरे दोनों भाइयों का अभूतपूर्व सहयोग मुझे प्राप्त हुआ।
राहुल लाल---प्रशासनिक अधिकारी बनकर आपके महत्वपूर्ण प्राथमिकता क्षेत्र क्या होगें?
अनु कुमारी--सर मैं महिला सशक्तीकरण, स्वास्थ्य,शिक्षा इत्यादि को महत्वपूर्ण प्राथमिकता सूची में रखूँगी।साथ ही मेरा प्रयास होगा कि सिविल सेवाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में और भी वृद्धि हो।
राहुल लाल--आप संपूर्ण जीवन महिला सशक्तीकरण के प्रयासों के अतिरिक्त एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी के रूप में राष्ट्र निर्माण में लगे रहें।बहुत बहुत धन्यवाद।
अनु कुमारी---प्रणाम सर और बहुत बहुत धन्यवाद।
(इस इंटरव्यूह को विस्तार से देखने के लिए यूट्यूब पर राहुल लाल अन्नु कुमारी टाइप कर विस्तार से देखें।स्पष्ट आवाज हेतु ईयर फोन का प्रयोग करें।)
संलग्न-1 यूपीएससी/आईएएस 2nd topper अनु कुमारी के हरियाणा, सोनीपत स्थित घर में इंटरव्यू देते हुए तस्वीर।
संलग्न-2--अपने 4 वर्षीय पुत्र के साथ टॉपर अनु कुमारी
संलग्न-3-हरियाणा सोनीपत के घर में टॉपर अनु कुमारी
संलग्न-4-अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ राहुल लाल


-राहुल लाल (कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ)

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