-विनोद कुमार विक्की (स्वतंत्र लेखक सह व्यंग्यकार)

शहर में "व्यंग्य कार्यशाला"का आयोजन हुआ।वरिष्ठ व्यंग्यकारों को सम्मानित करने की योजना भी थी।
विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्य कला एवं संस्कृति मंत्री को आमंत्रित किया गया था।
व्यंग्य जगत के बड़े-बड़े धाकड़,संघर्षरत सुरमा सहित व्यंग्य की चड्डी-लंगोट धारण करने वाले नवोदित व्यंग्यकार भी इत्र-मजमुआ लगाकर मंच पर आसीन हो गए ।
नेताजी के दीप प्रज्वलित करने के साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
कई व्यंग्यकारों ने श्रोताओं के बीच राजनीतिक,सामाजिक,आर्थिक आदि मुद्दों पर तैयार अपनी व्यंग्य बिरयानी,खिचड़ी की जमकर छौंक लगाई।कुछ ने शरद जोशी,हरिशंकर परसाई आदि की रचनाओं का व्यंग्य पाठ भी किया।श्रोताओं की तालियां व्यंग्यकारों के लिए पावर बैंक का कार्य कर रही थी।
कार्यक्रम के अंत में पुरूस्कारों का वितरण किया गया।कार्यक्रम के समापन पर अतिथि एवं उपस्थित लोगों के लिए पंचअंगुष्ठ मुखहवन अर्थात अल्पाहार की शानदार व्यवस्था की गई थी।
कार्यक्रम से लौट रहे नेताजी के पीए के मन में एक जिज्ञासा बनी हुई थी।वह अपनी जिज्ञासा मिटाते हुए नेताजी से पूछ बैठा-" प्रोग्राम तो काफी अच्छा था सर... लेकिन ये लेखक लोग जो गोल-गोल रचना पाठ किए ये कुछ पल्ले नहीं पड़ा....सर ये 'व्यंग्य' क्या होता है?
नेताजी काफी गंभीर होकर बोले-"ऐसा है भाई ये गोल-गोल व्यंग्य हर किसी के समझ से परे का चीज है! मै तो खुद व्यंग्य का आधा 'व' भी नहीं जानता हूँ ...वो तो उन लेखकों ने निमंत्रण दिया तो चले आए सम्मान समारोह में......शिक्षित वर्ग है वोट के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी होती है इन लोगो से.......बस उनकी व्यंग्य पाठ पर गंभीर मुद्रा में गर्दन हिलानी पड़ती है...बीच बीच में 'गम्भीर कटाक्ष','शानदार','जबरदस्त' आदि
शब्दों एवं तालियों से व्यंग्यकारों का हौसला अफजाई करना होता है.....उसके बाद तो अपना वोट बैंक तैयार...."।
"बात तो आपने सही कही है सर.........हमें तो बस गोल गोल राजनीति आती है....खैर वो एक लेखक ने जो कहानी कही.........हां याद आया वो किसी हरिशंकर परसाई की कहानी थी शायद 'भेड़ और भेड़िए' वो बड़ी मजेदार थी"।चेहरे पर संतुष्टि के भाव लाते हुए पीए ने नेताजी की बातों का समर्थन किया।
"अच्छा याद दिलाया तुमने..... .. बड़ी रोचक कथा थी .... वो तो पक्का 'पंचतंत्र'से ली गई होगी क्योंकि जानवरों वाली कहानियाँ पंचतंत्र मे ही है....।नेताजी ने अपने हिन्दी साहित्य के ज्ञान को बांचते हुए पीए की जिज्ञासा को शांत किया।

 


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