-अमरीश सरकानगो (सामाजिक मामलों के जानकार)

विश्व में क्रिप्टो मुद्रा, मुख्यत: बिटकॉइन का फैलता दायरा और संबंधित जोखिम
जैसे-जैसे विश्व में तकनीक का विकास और प्रसार हो रहा है, देशों और लोगों के बीच दूरियां कम होती जा रही है. धीरे-धीरे वो लोग, जो आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा सक्षम है, कई मायनों में वैश्विक नागरिक बनते जा रहे है. आज से कुछ साल पहले ऐसी किसी मुद्रा के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था जो किसी देश की केंद्र सरकार ने नहीं जारी की हो, और फिर भी जिसमें पूरे विश्व के लोग लेन-देन कर रहे हों. डिजिटल तकनीक से अब ये भी संभव हो गया है. सबसे पहले, 1990 के दशक में, ई-गोल्ड नामक डिजिटल मुद्रा, जो सोना रखने पर दी जाती थी, अस्तित्व में आयी थी. आज विश्व के बड़े हिस्से में डिजिटल मुद्रा इस्तेमाल हो रही है.
गैर-परंपरागत मुद्राओं में आमतौर पर तीन तरह की मुद्राएं होती है - वर्चुअल मुद्रा, डिजिटल मुद्रा और क्रिप्टो मुद्रा. वर्चुअल मुद्रा ज्यादातर इंटरनेट पर खेले जाने वाले खेलों में या किसी सीमित दायरे में इस्तेमाल के लिए बनाई जाती है. वर्चुअल मुद्रा इंटरनेट पर ही चलती है. डिजिटल मुद्रा भी वर्चुअल मुद्रा की तरह वह मुद्रा होती है जो छापी या धातु से बनायी नहीं जाती, पर डिजिटल मुद्रा इंटरनेट से बाहर की दुनिया में भी चलती है और उससे सामान या सेवा का भुगतान किया जा सकता है.
क्रिप्टो मुद्रा एक प्रकार की डिजिटल मुद्रा है जो कंप्यूटर के द्वारा तैयार की जाती है. क्रिप्टो मुद्रा जटिल क्रिप्टोग्राफि़क अल्गोरिथम से बनती है और उसकी ब्लॉक चेन होती है. ये इंटरनेट पर संचालित होने वाली ऐसी मुद्रा है जो खरीदी-बिक्री में इस्तेमाल की जा सकती है, देशों की सीमाओं का उस पर बंधन नहीं रहता, और उससे तत्काल पैसा हस्तांतरित किया जा सकता है. क्रिप्टो मुद्रा क्रिप्टोग्राफ़ी से इसीलिए सुरक्षित की जाती है ताकि किसी भी सूरत में उसकी नक़ल नहीं की जा सकें. क्रिप्टो मुद्राओं में ब्लॉक चेन नामक डिजिटल बहीखाता होता है, जिसमें उस मुद्रा में हुए सारे लेन-देन व्यक्तियों के नाम से नहीं बल्कि डिजिटल पते के खाते में दर्ज होते है. क्रिप्टो मुद्रा में लेन-देन आमतौर पर पलटा नहीं जा सकता. यानि अगर लेन-देन दर्ज हो गया तो फिर किसी भी कारणवश पैसा देनदार को वापस नहीं मिल सकता.
2009 से अस्तित्व में आई बिटकॉइन पूरे विश्व में सबसे ज्यादा लोकप्रिय डिजिटल मुद्रा है. सातोशी नाकामोटो के द्वारा बनायी गई ये मुद्रा पूरी दुनिया में इस्तेमाल हो रही है. वर्तमान आकड़ों के अनुसार अभी दुनिया में करीब एक करोड़ सड़सठ लाख बिटकॉइंस (वर्तमान बाजार पूंजीकरण 300 बिलियन डॉलर) चलन में है. बिटकॉइन के आविष्कारकों के अनुसार बिटकॉइंस सीमित संख्या में ही जारी किये जा सकते है और उनकी कुल क्षमता करीब दो करोड़ दस लाख बिटकॉइंस ही है. अभी एक बिटकॉइन की कीमत करीब 17500 डॉलर है, मगर इसमें हर दिन काफी उतार-चढ़ाव आता है.. बिटकॉइन के भी चोरी होने की सम्भावना रहती है और उस सूरत में ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता. बिटकॉइन बनाने का फार्मूला और सॉफ्टवेयर आसानी से उपलब्ध है और इसे उपयोगकर्ता के द्वारा बनाया जा सकता है.
बिटकॉइन के बाद रिपल (बाजार पूंजीकरण -120 बिलियन डॉलर), इथरम (100 बिलियन डॉलर), बिटकॉइन कैश (46 बिलियन डॉलर), कार्डेनो (26 बिलियन डॉलर) लिटकॉइन (16 बिलियन डॉलर), नेम (15 बिलियन डॉलर), स्टेलर (12 बिलियन डॉलर), आइओटा (10 बिलियन डॉलर) और डेश (10 बिलियन डॉलर) वो अन्य डिजिटल मुद्राएं है, जिनका बाजार पूंजीकरण 63000 करोड़ रूपए से ज्यादा है.
डिजिटल मुद्राओं में 24 घंटों में 10-20त्न का भी उतार-चढ़ाव हो सकता है. इस लिहाज से ये काफी जोखिमभरा सौदा है. डिजिटल मुद्रा का इस्तेमाल गुमनाम रूप से भी किया जा सकता है. भले ही डिजिटल मुद्रा बनाने वालों ने इसे सही उद्देश्य से बनाया हों, मगर डिजिटल मुद्रा का उपयोग आपराधिक मामलों में होने या कालेधन को सफ़ेद करने में किए जाने की अपार संभावनाएं है. इसमें लेन-देन करने वाले की पहचान गुप्त रखी जा सकती है. एक व्यक्ति एक से अधिक डिजिटल पते भी रख सकता है. डिजिटल मुद्रा को आमतौर पर इसकी तरलता के कारण भी जोखिम भरा माना जाता है. फिरौती के लिए साइबर हमले करने वाले रैनसमवेयर, जैसे वोनाक्राई के लिए क्रिप्टो मुद्रा सर्वश्रेष्ठ विकल्प है जिससे वो दुनिया में कहीं से भी फिरौती ले सकते है और अपनी पसंद की जगह पर उसे दूसरी मुद्रा में बदल सकते है.
इस मुद्रा को विभिन्न देशों की सरकारें भविष्य में अपने कानून के दायरे में भी ला सकती है. जहाँ एक और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ, जैसे अमेरिका और चीन की सरकारें डिजिटल मुद्रा को लेकर काफी सतर्कतापूर्ण रुख अपना रही है, वहीँ जर्मनी, कनाडा, रूस, नीदरलैंड्स, यूनाइटेड किंगडम, स्विटजऱलैंड, दक्षिण कोरिया और यूक्रेन जैसे देशों की सरकारें और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा को भविष्य की मुद्रा की तरह देखकर उस दिशा में कदम उठा रहे है. इनमें से कुछ ने तो अपने देशों में खुद की डिजिटल मुद्रा जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.
आमतौर पर क्रिप्टो मुद्रा के बारे में ये कहा जाता है कि इसमें उतना निवेश करना ही ठीक है जितनी राशि खोने का खतरा उठाया जा सकता हो. पर महत्वपूर्ण तथ्य ये भी है कि बड़े व्यवसायियों के साथ-साथ अब मध्यम-वर्गीय टेक्नोक्रैट, गृहिणियां और युवा वर्ग भी क्रिप्टो मुद्रा, खासतौर पर बिटकॉइन में बिना सम्पूर्ण जोखिम जाने निवेश कर रहे है.
तकनीक के विस्तार को तो रोका नहीं जा सकता पर उसे इस तरह से नियंत्रित तो किया जा सकता है कि उसका लाभ ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को मिले, उससे जुड़े मसले स्पष्ट तौर पर देशों के कानून के दायरे में आए, और उसके गलत इस्तेमाल पर प्रभावशाली तरीके से रोक लगे. क्रिप्टो मुद्रा का बाज़ार पूंजीकरण पिछले एक साल में 1200त्न बढ़ा है. पर अगर कभी विश्व के प्रमुख देशों की सरकारों ने एक साथ मिलकर क्रिप्टो मुद्राओं से संबंधित कड़े कानून बनाए, तो क्रिप्टो मुद्राओं का बाजार धराशायी भी हो सकता है. फिर भी ये तो तथ्य है कि डिजिटल मुद्रा का विस्तार आने वाले समय में काफी तेज़ी से होगा पर तब इसे सही तरीके से नियंत्रित भी किए जाने की आवश्यकता होगी ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ें, उनका पैसा अनियमित उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहे, और साथ ही साथ ये भी सुनिश्चित हो कि डिजिटल मुद्रा विश्व में कालेधन को सफ़ेद करने का जरिया बन कर ना रह जाए. समय के साथ सभी बड़े देशों की सरकारें और केंद्रीय बैंक भी इसमें पूरी तरह से जुड़ जाए, डिजिटल मुद्रा के प्रारूप में एकरूपता आए, और इस मुद्रा को लेकर सारे विश्व में एक समान कानून हों. इसमें धोखाधड़ी की संभावनाएँ भी ना के बराबर होनी चाहिए. तब ये मुद्रा पूरी दुनिया में बड़े स्तर पर पैसों के लेन-देन के लिए स्वीकार की जा सकती है.



ई.एच. 217 स्कीम नं. 54, आनंद माथुर हॉल के पास, विजयनगर इंदौर (म.प्र.)-452010
09300533771, 09329733771
amreesh.sarkango@gmail.com

Share this article

AUTHOR

Editor

हमारे बारे में

नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

ताज़ा ख़बरें