- ओम प्रकाश उनियाल

हाल ही में देहरादून में सौतेली मां द्वारा बेटी की नृशंस हत्या किए जाने जैसी घटना ने शायद हरेक को यह सोचने पर मजबूर कर दिया हो कि आखिर एक मां ने इस प्रकार का जघन्य अपराध करने का दुस्साहस कैसे किया। मां सौतेली हो या सगी ममत्व की मूरत होती है। जाहिर है कि इस प्रकार की घटनाएं अक्सर बदला लेने की भावना से ओत-प्रोत होने के कारण ही घटती हैं। बदला लेने की ठानने वाला एक ही ध्येय को लेकर चलता है। जब तक वह उस ध्येय तक नहीं पहुंचता तब तक उसकी मन:स्थिति भ्रमित रहती है। यह कोई नयी घटना नहीं। अनेकों, देश-विदेश में घटती रहती हैं। महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। कहीं बहू को सास-ननद द्वारा जला देने, गला घोटने तो कहीं जहर देकर मारने जैसी घटनाएं भी घटित होती हैं। महिला ही महिला की दुश्मन बन रही हैं। अब इन घटनाओं में वृद्धि होने लगी है। पुुरुषों द्वारा तो महिलाओं के साथ किए जाने वाले अपराधों की तो कोई गिनती ही नहीं है। लेकिन महिला द्वारा महिला की हत्या करना कई सवाल पीछे छोड़ जाता है। पारिवारिक विवाद, संपति विवाद, प्रेम-प्रसंग विवाद, इस तरह के अपराधों के कारण बनते देखे गए हैं। अपराध फिल्मों, टीवी धारावाहिकों का बढ़ता असर भी अपराधिक प्रवृति को बढ़ावा देते हैं। महिलाओं की महिलाओं के प्रति अपराधिक प्रवृति को कैसे रोका जाए इसके लिए गहन विचार करने की आवश्यकता है। यह तो हर अपराध करने वाले को पता होता है कि हत्या जैसे मामलों में उसे आजीवन कारावास या फिर फांसी की सजा मिलेगी। हमारे देश का कानून इतना लचीला है कि न्याय के लिए लंबा इंतजार करना होता है। फिर भी ऐसे घिनौने कुकृत्य किए जाते हैं। इस प्रकार की घटनाओं की पुनर्रावृति न हो इसके लिए उन महिलाओं को हमेशा सजग, सचेत रहना चाहिए जिनके परिवार में इस प्रकार की परिस्थितियां उपजी रहती हैं या बनने की संभावना बनी रहती है। उन्हें जरा-सी शंका होने पर अपनी सहेलियों, मित्रों, रिश्तेदारों को भी संकेत दे देने चाहिए। अपने साथ हो रहे जुल्म को दबाने की कोशिश बिल्कुल न करें। कई महिला संगठन हैं जो मदद कर सकते हैं। यदि महिला अशिक्षित या सीधी-साधी है तो कम से कम अपनी प्रताड़ना को किसी तरह परिवार से बाहर पहुंचा दें। यदि दबंग परिवार की महिला के साथ ऐसा कुछ घटने की संभावना हो तो सामाजिक संगठनों, प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाएं। कुल मिलाकर ऐसे प्रकरणों को तुरंत किसी तरह बाहर निकालें। परिवार व अपनी छवि को एक तरफ रखें। मन में डर पैदा न होने दें। डटकर मुकाबला करें। देखें फिर कोई आप पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा। महिलाएं समाज के डर से डरती हैं। जो समाज महिलाओं को संरक्षण व सुरक्षा नहीं दे सकता ऐसे नपुंसक समाज के खिलाफ काली, दुर्गा बनकर अपनी शक्ति का उपयोग करें। पुलिस भी एक माध्यम है किंतु पुलिस की कार्य प्रणाली से सभी परिचित हैं। फिर भी किसी न किसी तरह पुलिस, महिला हेल्प-लाइन तक अपनी बात अवश्य पहुंचाएं।

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