(पुस्तक समीक्षा विनोद कुमार विक्की)

आज के मोबाइल गेम,विडियो गेम व भरे-पूरे कार्टून चैनलों के बीच बाल मनोविज्ञान को समझते हुए बाल पाठकों पर केंद्रित तथा बच्चों को आकर्षित करने वाले बाल साहित्य या बाल पत्रिका का प्रकाशन किसी चुनौती से कम नहीं है।
इस संदर्भ में हालिया प्रकाशित घरौंदा निश्चय ही सराहनीय व संग्रहणीय बाल पुस्तक है।
नए पल्लव समूह के प्रबंध संपादक राजीव मणि साहित्य संपादन क्षेत्र में बिलकुल नया नाम है किंतु कम समय में उत्कृष्ट व बेहतर संपादन के कारण अब वो किसी परिचय के मोहताज नहीं है।उनके अथक प्रयास से बाल साहित्य 'घरौंदा' के संपादन की जिम्मेदारी प्रदीप कुमार शर्मा को सौंपी गई।
युवा संपादक प्रदीप कुमार शर्मा के संपादन में बच्चों की बेहतरीन रचनाओं का शाहकार है घरौंदा।
इस पुस्तक में 50 बाल रचनाकारों की रचनाएं शामिल की गई है।जिसके तहत बाल मनोविज्ञान को समझते हुए रचनाओं को शामिल किया गया है।चाहे शिक्षाप्रद कविताएँ,कहानियाँ हो या स्वच्छता अभियान को प्रोत्साहित करने वाली बालगीत हो या फिर हास्य-व्यंग्य, बुझौव्वल पहेली हो या फिर रंग-भरो स्तम्भ सभी सामग्री एक से बढ़कर एक।
इस पुस्तक में संपादिका कीर्ति श्रीवास्तव, राजकुमार जैन राजन(संपादक साहित्यसमीर दस्तक) आकांक्षा यादव,अरुणिमा सक्सेना जैसे सुप्रसिद्ध साहित्यकारों के साथ साथ मीनाक्षी पारिक,मंजू शर्मा आदि जैसे नवोदित रचनाकार एवं बाल रचनाकार रिचा राठौड़ की स्तरीय रचनाओं का संकलन किया गया है। 'हिन्दी बाल साहित्य:भविष्य एवं सरोकार'शोध आलेख के तहत परषोत्तम कुमार ने बालमन एवं बाल पत्रिकाओं के अंतर्संबंध को बेहतर समझाने की कोशिश की है।"परीक्षा और आत्महत्या" लघु टिप्पणी द्वारा अशोक चतुर्वेदी ने बच्चों को धैर्य का अनूठा संदेश दिया है तो कीर्ति श्रीवास्तव ने 'किसान' कविता को बालमन के अनुरूप शब्द दिए है तो इलेक्ट्रॉनिक बधाई संदेश पर तंज करते हुए विनोद कुमार विक्की ने 'डिजिटल हैप्पी न्यू ईयर' व्यंग्य लिखा है।राजेश सिंह की 'वजन से ज्यादा बस्ता भारी' राजकुमार जैन राजन की पेड़ बचाए, शिशु रोग विशेषज्ञ डाॅ अखिलेश शर्मा की प्रेरक कविता मंजिल,मनोरंजन सहाय की भगवत गीता के बारे में दी गई जानकारी,कवि राधे की चींटी से सीख,दीक्षा चौबे की रचनाएं राष्ट्र भाषा हिन्दी एवं तिरंगा झंडा सहित तमाम रचनाकारों की उम्दा रचनाएँ पठनीय है।
घरौंदा पुस्तक से प्रेरित हो कई बाल साहित्यकार शिक्षकों एवं संपादकों ने अखिल भारतीय स्तर पर "घरौंदा क्लब" का भी निर्माण किया है जिसमें बच्चों की प्रतिभा को उभारकर उसे सृजन के प्रति आकर्षित करने का सराहनीय व प्रशंसनीय कार्य किया जा रहा है।घरौंदा की उपलब्धि एवं सफलता से प्रभावित हो संपादकीय टीम जल्द ही घरौंदा की दुसरी सीरीज बाजार व बच्चों के बीच लाने का मन बना चुकी है।
तनय प्रकाशन से प्रकाशित रंगीन कार्टून से सुसज्जित कुल 176 पेज वाली आईएसबीएन संख्या प्राप्त रंगीन बाल साहित्य की कीमत मात्र 200 रूपये है।
जो संपादक राजीव मणि एवं प्रदीप कुमार शर्मा से 9835265413 एवं 8825306628 पर संपर्क कर आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

 

महेशखूंट बाजार जिला-खगडिय़ा (बिहार)
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