बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार)

भारत में 15 मार्च राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है। सरकार के स्तर पर विज्ञापन और नेताओं के वक्तव्य के माध्यम से दिवस के आयोजन की खानापूर्ति की जाती है। जिला स्तर पर गोष्ठियों के माध्यम से उपभोक्ता दिवस मानाने की खबरे समाचार पत्रों में पढ़ने को मिल जाती है। इससे दिवस मनाने की कागजी कार्यवाही जरूर पूरी होती है मगर मकसद हासिल नहीं होता। असल में विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस बाजार में ग्राहक के साथ होने वाले अन्याय से उनके अधिकारों को संरक्षित कर जागरूक करता है। सरकार बाजार में उपभोक्ता का शोषण रोकने के लिए कोई प्रभावी कार्यवाही करने में निष्फल हुई है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अनुसार कोई व्यक्ति जो अपने उपयोग के लिये सामान अथवा सेवायें खरीदता है वह उपभोक्ता है। क्रेता की अनुमति से ऐसे सामान सेवाओं का प्रयोग करने वाला व्यक्ति भी उपभोक्ता है। हम में से प्रत्येक किसी न किसी रूप में उपभोक्ता ही है। यही उपभोक्ता सरकार की उदासीनता के चलते आज बाजार के मायाजाल में फंस कर रह गया है और उसे राहत की उम्मीद दूर दूर तक दिखाई नहीं दे रही है।
यह उपभोक्ता दिवस हम ऐसे समय में मना रहे है जब भारत सरकार ने करों में एकरूपता लाने के लिए जीएसटी लागू की है। जीएसटी की भावना उपभोक्ता को राहत प्रदान करने की है मगर देखा यह गया है कि राहत के नाम पर उपभोक्ता शोषण के मकड़जाल में फंस कर रह गया है। जीएसटी लागू होने के बाद भी बाजार में आज भी सामान पुराने मूल्य पर ही बेचा जा रहा है। किसी वस्तु पर जीएसटी का उल्लेख नहीं है। जिन वस्तुओं पर टैक्स कम हुआ है उसका फायदा अब तक उपभोक्ता को नहीं मिला है। लगता है नोटबंदी की भांति जीएसटी पर भी पूरा होमवर्क नहीं किया गया जिसका खामियाजा उपभोक्ता को उठाना पड़ रहा है।
बाजार में उपभोक्ताओं को ठगने के नये-नये तरीके देखने को मिल रहे हैं। आम आदमी अपने घरेलू और रोजमर्रा के काम में आने वाले सामान की गारन्टी-वारन्टी, बीमा और सर्विसिंग के चक्कर में हैरान-परेशान है। उपभोक्ता ठगी और लूट के इस मायाजाल में फंसता चला जारहा है और इससे निकलने का कोई रास्ता उसे नजर नहीं आ रहा है। आजकल बीमा पाॅलिसियों की जानकारी के नाम पर आने वाले फोन काल्स ने भी जीना दूभर कर रखा है। ठगी के अजब-गजब तरीकों से बाजार भरा पड़ा है। यदि आपने अपने वाहन का बीमा करा रखा है ओर यह जानकर अपने को सुरक्षित समझ रखा है कि दुर्घटना का क्लेम आपको सही-सही मिल जायेगा तो मुगालते में मत रहिये। बीमा कराने के दौरान बीमा प्रतिनिधि आपको आश्वस्त करता है कि दुर्घटना में होने वाला हर्जाना आपको शत प्रतिशत या मामूली राशि काटकर मिल जायेगा। मगर दुर्घटना का क्लेम लेते समय मोटर कम्पनियां बिल में से एक बड़ी राशि आपसे वसूल कर लेती है। आपको बताया जाता है कि इसमें फाइल चार्जेज और कुछ पाटसर् के पैसे आपको वहन करने होंगे।

इसी भांति समाचार पत्रों में आपके घरेलू सामान की ए.एम.सी करवाने के नाम पर कुछ संस्थाओं और कंपनियों के विज्ञापनों की भरमार देखने को मिलेगी। सेवा सर्विसिंग के नाम से आपके घरेलू सामानों यथा- ए. सी., फ्रीज, वाशिंग मशीन, टी.वी. आदि सामानों की ए.एम.सी. की जाती है। मगर आपको जोरदार झटका उस समय लगता है जब आपका सामान खराब हो जाता है और आप ए.एम.सी. करने वाली संस्था को काल करते है। पहले तो वे समय पर आपके यहाँ आयेंगे नहीं और यदि आ गये तो किसी महंगे पाटर्स को खराब बताकर दुरूस्त करने के नाम पर ले जायेंगे और फिर कई हजार का बिल थमा कर वसूली करंगे।

इसी भांति जब आप कोई घरेलू इलेक्ट्रानिक सामान खरीदते हो तो एक से पांच साल की वारन्टी दी जाती है। शर्तें बहुत ही छोटे अक्षरों में लिखी जाती है, जो कि पढ़ने में नहीं आती। वारन्टी पीरियड में आपका उपकरण खराब हो गया तो उसे ठीक कराना या बदलवाना टेढ़ी खीर है। आप जिस नम्बर पर शिकायत दर्ज करवाते हैं, वहाँ बड़ी मुश्किल से आपका सम्पर्क हो पाता है। शिकायत दर्ज कराने के बाद कई दिन तक कोई मैकेनिक आता नहीं है। यदि मैकेनिक आपके घर आ गया तो वह आपकी परेशानी बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। आपका फ्रीज खराब हो गया और वारण्टी पीरियड में है तो वह वर्कशाॅप ले जाने के नाम पर आपसे हजार रूपये वसूलेगा। वह आपको बतायेगा कि परिवहन शुल्क आपको देना है। फिर बतायेगा जो पार्ट्स खराब है उसे ठीक कर दिया है मगर कुछ ऐसे पाटर्स होते हं, जिनकी कोई वारन्टी नहीं होती, उसकी राशि आपसे वसूल करेगा। अच्छी सर्विस के नाम पर उपभोक्ता ठगी के मायाजाल में फंस कर अपने को असहाय महसूस करते हं। इस मायाजाल से निकलने के लिए वारन्टी सर्विस की शर्तों को भलीभांति समझने और जागरूक होने की महत्ती जरूरत है।

डी-32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218, E-mail : bmojha53@gmail.com

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