-अभिषेक राज शर्मा

आजादी को ना जाने कितने वर्ष गुजर गये, देश कुछ हद तक तरक्की किया, औद्योगिक विकास,शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक क्रांति हुई।
जो देश को विश्व बिरादरी में आगे की पंक्ति में खड़ा कर दिया, आज अगर संसार हमारे तरफ उम्मीद से देख रहा हैं उसका कारण यहां के मेहनती श्रमिक और युवा वर्ग जो देश को नये सिरे से खड़े करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।
कभी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी ने कहा था कि भष्ट्राचार का खेल सरकार का एक रूपया जनता के बीच जाते-जाते पैसा का रूप धारण कर लेता है।
सच में अगर देश के व्यवस्था से भष्ट्राचार को बाहर निकाल कर कर दे आने वाले समय में भारत एक भारी अर्थव्यवस्था के साथ विकसित राष्ट्र होकर उभर सकता है मगर ऐसा कभी संभव नही है।
क्योंकि यहां लोकतंत्र वर्तमान में अधुरा सा लगता जो बस धन पर लड़ने वाला पारम्परिक व्यवस्था होता जा रहा है ।
बात दलितो की हो आज भी दलितो का नाम सुनते हि मैली कुचली कपड़े मे बेबस इंसान की तस्वीर दिल में आ जाती है।
आज भी वास्तविक स्थिति मे दलित समाज 90% निरश्रर और अशिक्षित जिनका जिम्मेदार कौन है जो भी हो वह जरूर कही ना कही अम्बेडकर जी के सिद्धांत का मजाक उड़ा रहा होगा।
ग्रामीण श्रेत्र मे जीवनयापन के लिऐ मजदूरी, ग्राम से पलायन कर रहे है, दुख : होता कि
देश को आजाद हुये लगभग 7 दशक बीत गया है बाबा साहेब ने दलित को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संविधान मे कई प्रमुख अधिकार दिये, लगभग सभी राजनीतिक दल ने देश की सत्ता और प्रदेश की सत्ता में मलाई काटा मगर जवाब दे कि दलित हित में आज क्या किया जो दलित आज भी सड़क पर खड़ा खुद पर अत्याचार और गरीबी का न्याय मांग रहा है।
आज भी किसी-किसी स्थान पर दलितो जमकर शोषण चल रहा है जो एक समाजिक न्याय का वास्तविक अर्थ की सख्त जरूरत दर्शाता है।
समाचार पत्र में प्रतिदिन नये घटना का जिक्र होता जो बेहद निराशाजनक लगता है।
आज भी दलितो को पिछड़ेपन का जिम्मेदार कोई वह दलित समाज के दलित चितंक और विद्वान जो जानबूझकर काल्पनिक गाथा और विरोधी मानसिकता का निर्माण करते है, कभी भी शिक्षा के बारे में समाजिक स्थित की चर्चा नही करते वरन टकराव की बात अच्छी लगती है।
एक मित्र ने एक गुजरात के दलित चितक का विडियो भेजा,
जो खुले आम स्वर्ण बिरादरी को गाली दे रहे और भारत से खदेड़ने की बात कर रहे थे।
दुख: हुआ
अभी स्वर्ण क्या कर रहे जो उनके आस्था को भावना की मजाक उड़ा रहे हो वैसे स्वतंत्र भारत के निवासी हो,अभी आपके पास समानता का अधिकार है।
उस दलित चितंक की जहर वाले भाषण से
एक विचार मन में उत्पन्न हो गया,
काल्पनिक कथा मे बहुत खतरनाक जो किसी भी व्यक्ति को समाज के लिऐ घातक कर सकता है।
आज भारत का जिम्मेदार नागरिक अपने कमाई से कर जमा करके देश की बुनियादी ढांचा को मजबूत करने मे लगा है ।
अम्बेडकर जी ने लंदन मे एक कार्यक्रम में कहा था "अपनी कमजोरी को ना छुपाओ उसे एक मजबूत हथियार की तरह बनाकर रखो।
वो कहते कि आराजकता समाज की बुनियाद को तोड़कर बिखेर देता है।
बात दलितो के ठेकेदार की हो सब कुछ ठीक नही चल रहा है,
वोट का सौदा कुछ लोगो की झोली भर देता है।
आज का दलित क्या सिर्फ एक वोट बैंक बनकर रह गया या सिर्फ भेड़ चाल का नमूना जो किसी के बहकावे में आकर लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा देता है।
दलित कल भी खून-पसीना बहाता वह आज भी बहा रहा है।
दलित उपदेशको का दर्शन दिल्ली के vip इलाके के एयरकंडीशन आफिस मे बैठकर क्रांतिकारी विचार पैदा करते देखा जा सकता है ।
कहते पहले शिक्षित बनो अधिकार दौड़ाकर पीछे आ जायेगा,मगर समझेगा कौन?

जौनपुर (उप्र )
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