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-डॉ प्रदीप उपाध्याय मौका भी रहता है और दस्तुर भी,तभी तो खाने-खिलाने की बात होती है।अब खाने-खिलाने पर भी यदि प्रश्नचिन्ह लग जाएं,पाबन्दी की बात करेंगे,तब तो हो गया काम!आखिर सार्वजनिक जीवन में काम करने कोई क्यों आयेगा!ठीक है आप सत्ता में आये तब आपने कहा था कि न खाऊंगा और न ही खाने दूंगा लेकिन खाने वालों को क्या रोक पाये हैं!खाने वालों को और खिलाने वालों को आज…
-राहुल लाल (कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ) ब्यूनस आयर्स में विश्व व्यापार संगठन(WTO) की 11 वीं मंत्रिस्तरीय बैठक अमेरिका के अड़ियल रवैया से आज देर रात विफल हो गई।फलत:सम्मेलन बिना किसी बाध्यकारी घोषणापत्र के ही समाप्त हो गया। जेनेवा 2011 के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के बाद ऐसा दूसरी बार हुआ है,जब सम्मेलन कोई बाध्यकारी आउटकम देने में विफल रहा है।अमेरिका ने सार्वजनिक भंडारण के मुद्दे के स्थायी समाधान के किसी भी प्रयास…
-रमेश सर्राफ धमोरा (स्वतंत्र पत्रकार) मानव जाति की मूल आवश्यकताओं की बात करें तो रोटी, कपड़ा और मकान का ही नाम आता है। इनमे रोटी सर्वोपरि है। रोटी यानी भोजन की अनिवार्यता के बीच आज विश्व के लिए शर्मनाक तस्वीर यह है कि वैश्विक आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब भी भुखमरी का शिकार है। अगर भुखमरी की इस समस्या को भारत के संदर्भ में देखे तो संयुक्त राष्ट्र द्वारा…
-राहुल लाल (कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ) रूस और चीन के रणनीतिक भागीदारी में वृद्धि तथा भारत के पश्चिमी देशों के करीब आने के बावजूद नई दिल्ली में रुस,भारत और चीन(आरआईसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई,तो भारत ने स्पष्ट कर दिया बहुध्रुवीय विश्व में हर मंच की उपयोगिता है तथा भारत आरआईसी के साथ वैश्विक कूटनीति में बड़ी साझेदारी करने से पीछे नहीं हटेगा।रूस,भारत और चीन ने आतंकवाद को वैश्विक…
-डॉ नीलम महेंद्र(Best editorial writing award winner) आज से पांच साल पहले 16 दिसंबर 2012 को जब राजधानी दिल्ली की सड़कों पर दिल दहला देने वाला निर्भया काण्ड हुआ था तो पूरा देश बहुत गुस्से में था । अभी हाल ही में हरियाणा के हिसार में एक पाँच साल की बच्ची के साथ निर्भया कांड जैसी ही बरबरता की गई, देश एक बार फिर गुस्से में है। 3 नवंबर 2017…
-डॉ मोनिका ओझा(वाणिज्य एवं अर्थशास्त्र की व्याख्याता) भारत सरकार ने जीएसटी की दरों में बदलाव कर जनता को राहत देने की एक बार फिर कोशिश की है। बताया जाता है गुजरात के चुनाव को देखते हुए राहत की यह वर्षा की गई है। हालाँकि यह अलहदा है कि संसद में जीएसटी को लागू करने के पक्ष में अपना समर्थन देकर कांग्रेस अब वादाखिलाफी पर उतर आयी है और इसे गबर…
- देवेंद्रराज सुथार जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आने लगता है, वैसे-वैसे नेताओं की भाषा का व्याकरण बिगड़ने लग जाता हैं। बेतुके बोल और अर्मादित भाषा का प्रयोग चुनावी रैलियों में कोई नई बात नहीं हैं। बल्कि इन बेतुके बोल बोलने वाले व विवादित बयान देने वाले नेताओं की सूची भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में बड़ी लंबी है। बहर-हाल, इस बार मुद्दा इसलिए गरमाया है कि गुजरात चुनाव के पहले चरण के…
आदित्य तिवारी एक ब्रिटिश भारतीय लोक सेवक सर जॉन स्ट्रैचे अपने प्रशिक्षु लोक सेवकों को संबोधित करते हुए कहा करते थे कि “भारत के बारे में प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण बात यह जानने की है कि वहां कोई भारतीय नहीं है और कभी कोई भारतीय नहीं था।” इतिहासकार डेविड लड्डन ने अपनी पुस्तक ‘कंटेस्टिंग द नेशनः रिलीजन, कॉम्युनिटी एंड पॉलिटिक्स ऑफ डेमोक्रेसी इन इंडिया’ ने लिखा है कि जिस क्षेत्र…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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