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-कमलेश पांडे (वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार) स्वतंत्र भारत के इतिहास में दो ऐसे मौके आए जब सियासी लोगों ने सामाजिक दबाव समूह के समक्ष घुटने टेकते हुए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा व्यापक जनहित में दिए गए फैसले को संसद में कानून बनाकर पलट दिया। पहली बार शाहबानो केस में 1986 में प्रचंड बहुमत प्राप्त राजीव गांधी सरकार द्वारा, और दूसरी बार एससी-एसटी एक्ट में 2018 में स्पष्ट बहुमत प्राप्त नरेंद्र मोदी…
-सुरेश हिन्दुस्थानी(वरिष्ठ स्तंभकार और राजनीतिक विश्लेषक) असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय नागरिक पंजी का अंतिम प्रारुप जारी कर दिया है। इसके अंतर्गत उन बांग्लादेशी नागरिकों को भारत से बाहर करने की योजना है, जो भारत में अवैध रुप से घुसपैठ करके आए हैं। उल्लेखनीय है कि असम में लगभग 50 हजार घुसपैठिए मुस्लिम अवैध रुप से निवास कर रहे…
-कमलेश पांडे (वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार) असम में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर-एनआरसी, की कुछेक खामियों को मुद्दा बनाकर विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा आए दिन संसद में जो सियासी दबाव बनाया जा रहा है, और इसके खातिर खूब बवाल मचाया जा रहा है उससे उनको कुछ अतिरिक्त वोट जरूर मिल जाएंगे, लेकिन उनके फेर में राष्ट्रीय हितों की बलि चढ़ना तय है। ऐसा इसलिए कि जब जब गोलबन्द विपक्ष, सत्ता पक्ष पर…
-निर्मल रानी वर्षा ऋतु के आगमन से पूर्व ही मौसम विभाग द्वारा यह बार-बार बताया जा रहा था कि इस वर्ष मानसून जमकर बरसेगा। हमारे देश के किसानों के लिए खेती-बाड़ी के समय पर होने वाली बरसात निश्चित रूप से ईश्वर की सौगात या ख़ुदा की रहमत का रूप है। शहरी क्षेत्रों में भी गर्मी से त्राहि-त्राहि कर रहे लोग बेचैनी से बारिश का इंतज़ार करते हैं। परंतु जब सामान्य…

देश देख रहा है

-डॉ नीलम महेंद्र(Best editorial writing award winner) आज राजनीति केवल राज करने अथवा सत्ता हासिल करने मात्र की नीति बन कर रह गई है उसका राज्य या फिर उसके नागरिकों के उत्थान से कोई लेना देना नहीं है। यही कारण है कि आज राजनीति का एकमात्र उद्देश्य अपनी सत्ता और वोट बैंक की सुरक्षा सुनिश्चित करना रह गया है न कि राज्य और उसके नागरिकों की सुरक्षा।कम से कम असम…
-सुरेश हिन्दुस्थानी(वरिष्ठ स्तंभकार और राजनीतिक विश्लेषक) भारत की राजनीति जिस प्रकार से स्वार्थ केन्द्रित होती जा रही है, उसी प्रकार से राजनीतिक दलों के सिद्धांत भी बलि चढ़ते जा रहे हैं। राजनीतिक दल ऐसा करके अपने घोषित सिद्धांतों को भी विस्मृत करने का कार्य करते दिखाई देते हैं। ऐसा केवल अपनी बात मनवाने के लिए ही किया जा रहा है। अभी हाल ही में एक समाचार देखने को मिला कि…
-अब्दुल रशीददेश के दिल दिल्ली के मंडावली इलाके में तीन बच्चियां शिखा, मानसी और पारुल अचानक दम तोड़ गईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला कि उनके पेट में अन्न का एक दाना तक न था। मतलब यह की इन मासूमों को अन्न का एक दाना भी कई दिनों से नसीब नहीं हो सका था,और जिंदगी के लिए तड़प तड़प कर दम तोड़ दी। विडंबना देखिए मौजूदा सरकार एक कागज़…
-विजय शर्मा सरकार की मजदूर व दलित विरोधी बनती छवि भाजपा को 2019 के लोकसभा चुनावों में चित्त कर सकती है। पहले कई औद्यौगिक क्षेत्रों में ठेका प्रथा कानूनन प्रतिबंधित थी। लेकिन मोदी सरकार मे 2017 में श्रम कानूनों में संशोधन करके ठेकेदारी प्रथा को चुपके से सभी क्षेत्रों के लिए खोल दिया है ताकि मजदूर तथा श्रमिक वर्ग शोषित जीवन जीने पर अभिशप्त हो सके। अब प्रधानमंत्री ने उत्तर…
बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) स्तनपान के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से 170 से भी अधिक देशों में एक से सात अगस्त विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। स्तनपान का उद्देश्य मां के दूध की अहमियत को समझने एवं बच्चे के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है। विश्व स्तनपान सप्ताह की वर्ष 2018 की थीम स्तनपान जीवन की नींव है। थीम के मुख्य उद्देश्य-…
-सोनिया चोपड़ा रेडियो के युग की शुरूआत के साथ ही आकाशवाणी और दूरदर्शन के जरिए दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की आवाज तो पहुंच जाती थी लेकिन ग्रामीण समुदाय की आवाज सरकार तक न तो पहुंचती थी और न ही सरकारी संसाधनों का इतना बोलबाला था कि हर तबके तक पहुंचा जा सके. समुदाय को विकास योजनाओं से जोड़ने तथा योजनाओं में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने तथा उनकी प्रमुख…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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