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-ओम प्रकाश उनियालदेहरादून(उत्तराखंड)| आज समूचे देश में पेयजल एवं सिंचाई के लिए पानी की समस्या विकराल रूप धारण करती जा रही है. जमीन का जल-स्तर निरंतर गिरता ही जा रहा है. बढ़ती आबादी के साथ-साथ पानी का उपभोग अधिक हो रहा है. कहीं सूखा तो कहीं पीने के पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते लोग. गर्मियों में तो हालात गंभीर बन जाते हैं. इसीलिए भारत सरकार इस महत्वकांक्षी योजना…
-ओम प्रकाश उनियालमनुष्य स्वयं तो स्वतंत्रता चाहता है मगर दूसरे को अपने वश में रखना चाहता है। जैसे पालतू बेजुबानों के साथ करता है। बंधन में रखना, उन पर अत्याचार करना, पालतू जानवरों से उनकी क्षमता से अधिक कार्य लेना अपना अधिकार समझता है। यही नहीं जंगली जानवरों पर भी अपना अधिकार जताता है। अपने को सबसे शक्तिशाली जता कर बेजुबानों के आगे दंभ भरने को शायद अपनी फितरत समझता…
-डा. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा कम उम्र में तन्हाई की जिंदगी जीने वाली महिलाआंे की तादाद मंे बढ़ोतरी बेेहद चिंता का विषय है। देश में सात करोड़ से अधिक महिलाओं का अकेली रहना कहीं ना कहीं हमारे सामाजिक ताने-बाने पर प्रश्नचिन्ह उभारने के लिए काफी है। 2011 के आंकड़ों का ही विश्लेषण करे तो पाएंगे कि देश में 7 करोड़ 11 लाख महिलाएं एकाकी जीवन जी रही है। सबसे चिंतनीय बात…
-डॉ प्रदीप उपाध्याय अब जब उन्होंने विश्वास तोड़ दिया तो बहुत से लोग कहने लगे हैं कि आप तो ऐसे न थे लेकिन क्या यह नई बात है जब लोग कह रहे हों कि आप तो ऐसे न थे!उनका आम से आप तक का सफर ही इस बात का सबूत है कि वे ऐसे ही थे।वे तो शुरु से ही कह रहे थे कि हाँ भाई,मै तो प्रारम्भ से ही…
देहरादून (हम हिन्दुस्तानी)- उत्तराखंड की गढ़वाली-कुमाऊंनी बोली में अब तक बड़े पर्दे की कई फिल्मों का निर्माण हो चुका है। राज्य की फिल्म-नीति कमजोर होने के कारण क्षेत्रीय फिल्म निर्माताओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन बोलियों में बनने वाला सिनेमा अभी तक पहाड़ तक अपनी ठोस पहुंच नहीं बना पाया है। सन् 1983 में उत्तराखंडी सिनेमा का जन्म हुआ। पहली गढ़वाली फिल्म बनी 'जग्वाल', जिसने दिल्ली,…
-निर्मल रानी देश के हिंदूवादी संगठनों द्वारा $खासतौर पर वर्तमान सत्तारूढ़ भाजपा जनता पार्टी एवं उसके संरक्षकों द्वारा महात्मा गांधी से लेकर पूरी कांग्रेस पार्टी तथा नेहरू-गांधी परिवार पर निशाना साधने के लिए सबसे बड़ा आरोप यही लगाया जाता रहा है कि यह भारतवर्ष में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वाला वर्ग है। यही कहकर गत् 70 वर्षों में इन्होंने देश के बहुसं य हिंदू समाज को धर्म के आधार…
-प्रभुनाथ शुक्ल (स्वतंत्र पत्रकार हैं) हिंदुस्तान से अंग्रेज़ विदा हो गए , लेकिन फूट डालो और राज करो का बीज़ जो उन्होंने बोया था। वह आज़ पूरे भारत में बिखर कर विशाल वटवृक्ष बन गया। जिसकी वजह से हमारा समाज जाति , धर्म , भाषा , नस्लवाद और दलित, अगडे, पिछड़े , हिंदुत्व और इस्लाम में विभाजित है । बाकि बची रिक्तता को राजनीति और नेताओं की गंदी सोच पूरा…
-​सुषमा मलिकमहिला प्रदेशाध्यक्ष CLA हरियाणा ​ "​मुझे गर्व है कि मैं बेटी हूं और मुझे सौभाग्य भी प्राप्त है कि मेरी दो बेटियां है। हम पढ़ लिखकर बहुत विद्वान मानने लगे हैं खुद को। चर्चा करके खुश होते है कि हमारे देश की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। सम्मान प्राप्त कर रही है गोल्ड मैडल ला रही है। देश का नाम ऊंचा कर रही है लेकिन मैंने…
-अमरीश सरकानगो (व्यंग्यकार) इतनी बड़ी किराने की दुकान के मालिक होने के बाद भी सेठ किरोड़ीमल को कहीं चैन न था. पिताजी से विरासत में मिली दुकान और मक्कारी की कला के बल पर सेठ ने काफी तरक्की कर ली थी. मिलावट करना और कम तोलना दुकान में नौकरों को मूलभूत ट्रेनिंग में सिखाया जाता था. गरीबों को उधार के जाल में फांसकर जब सेठ के पास बहुत दौलत जमा…
-डॉ प्रदीप उपाध्याय कोप्पल में एक कार्यक्रम के दौरान केन्द्रीय कौशल विकास राज्य मंत्री अनंत हेगड़े ने कहा था की खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले लोग नहीं जानते कि उनका खून क्या है.हाँ,संविधान यह अधिकार देता है कि हम धर्मनिरपेक्ष हैं लेकिन संविधान में कई बार संशोधन किया गया .हम यहाँ संविधान बदलने के लिए आये हैं.हेगड़े के इस बयान की चौतरफा आलोचना हुई और कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने भी…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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