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-अमरीश सरकानगो (सामाजिक मामलों के जानकार) विश्व में क्रिप्टो मुद्रा, मुख्यत: बिटकॉइन का फैलता दायरा और संबंधित जोखिमजैसे-जैसे विश्व में तकनीक का विकास और प्रसार हो रहा है, देशों और लोगों के बीच दूरियां कम होती जा रही है. धीरे-धीरे वो लोग, जो आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा सक्षम है, कई मायनों में वैश्विक नागरिक बनते जा रहे है. आज से कुछ साल पहले ऐसी किसी मुद्रा के बारे में…
-बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) भारत सरकार के आर्थिक सुधारों पर कई वैश्विक संगठनों के बाद अब विश्व बैंक ने भी अपनी मुहर लगादी है। विश्वबैंक का मानना है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद भारत ने इस क्षेत्र में तेजी से प्रयासकर अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का अहम् प्रयास किया है जिसकी अनदेखी नहीं की जासकती। विश्व बैंक ने कहा है कि भारत में वृद्धि…
-निर्मल रानी हमारे देश में आम जनता स्वतंत्रता को कुछ अपने ही तरीके से परिभाषित करने में लगी रहती है। आज़ादी का अर्थ पराधीनता से छुटकारा और मानसिक,सामाजिक तथा राजनैतिक स्वतंत्रता के बजाए कुछ इस तरह समझा जाता है गोया हम इस कद्र आज़ाद हैं कि जब और जहां चाहें जो चाहें वह कर सकते हैं। देश भर में होने वाले तरह-तरह के अपराध इसी मानसिकता का प्रमाण हैं। परंतु…
-बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) उत्तर प्रदेश में अखिलेश बिहार में तेजस्वी यादव, कर्नाटक में कुमार स्वामी, बिहार में चिराग पासवान, पंजाब में बादल, हरियाणा में चैटाला, कश्मीर में अब्दुल्ला, महाराष्ट्र में ठाकरे और सुप्रिय सुले के बाद अब राहुल गाँधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद पर निर्वाचित होने के बाद एक बार फिर देश में वंश और परिवारवाद की सियासत गरमा गई है। मोतीलाल नेहरू से राहुल गाँधी…
-प्रभुनाथ शुक्ल (स्वतंत्र पत्रकार हैं) युवा किसी भी राष्ट्र की असीम पूँजी होते हैं । आर्थिक, समाजिक और राजनीति में उनकी अहम भूमिका होती है । युवाओं में धारा और व्यवस्था बदलने की पूरी ताकत होती है । फ़िर जब भारत की अधिकांश आबादी का हिस्सा युवा हो , तो उसे दुनिया की तागत बनने से कौन रोक सकता है । अर्थशास्त्री अनीस चक्रवर्ती के विचार में आने वाले दशक…
- देवेंद्रराज सुथार* युगपुरुष, वेदांत दर्शन के पुरोधा, मातृभूमि के उपासक, विरले कर्मयोगी, दरिद्र नारायण मानव सेवक, तूफानी हिन्दू साधु, करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्त्रोत व प्रेरणापुंज स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता आधुनिक नाम कोलकता में पिता विश्वनाथ दत्त और माता भुवनेश्वरी देवी के घर हुआ था। दरअसल यह वो समय था जब यूरोपीय देशों में भारतीयों व हिन्दू धर्म के लोगों को हीनभावना से देखा जा…
-बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) बुजुर्गों को लेकर मानवता एक बार फिर शर्मसार हुई है। गुजरात के राजकोट से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहां एक बेटे ने अपनी बुजुर्ग और बीमार मां को छत से फेंककर मार डाला । आरोपी बेटा असिस्टेंट प्रोफेसर है। । भारत में कभी बुजुर्गों की पूजा की जाती थी। बुजुर्ग घर की आन बान और शान थे।…
-तनवीर जाफ़री कलयुग के जिन लक्षणों की परिकल्पना की गई है लगभग वे सभी लक्षण पृथ्वी पर साफ दिखाई देने लगे हैं। इंसान-इंसान की जान का दुश्मन बना बैठा है। रिश्ते अपना लिहाज़ ख़त्म कर चुके हैं। माता-पिता,नारी,वृद्ध अथवा असहाय लोगों का आदर-सम्मान समाप्त होता जा रहा है। देवी का रूप समझी जाने वाली महिला अपनी इज़्ज़त-आबरू बचाने की जंग लड़ रही है। पैसा व सत्ता हासिल करने के लिए…
-सुरेश हिन्दुस्थानी(वरिष्ठ स्तंभकार और राजनीतिक विश्लेषक) देश में होने वाले चुनावों के दौरान किस प्रकार किया जाता है, यह किसी से छिपा नहीं हैं, लेकिन पारदर्शिता के अभाव में खुला भी नहीं है। हम जानते हैं कि देश में भ्रष्टाचार और अनैतिक तरीके से कराए जाने वाले कार्यों के पीछे चुनाव को भी एक माध्यम बनाया जाने लगा है। चुनाव अनीति पूर्वक कमाए गए धन को खपाने का बेहतर माध्यम…
- देवेंद्रराज सुथार देश में बाघों की लगातार कम होती संख्या सरकार और पशुप्रेमियों के लिए चिंता का विषय है। कभी लोगों के बीच अपनी दहाड़ से दहशत पैदा कर देने वाले बाघ आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज केवल बाघों की आठ में से पांच प्रजाति ही बची है। वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ नानक संस्था का कहना माने तो 2022 तक बाघ जंगल से विलुप्त हो जाएंगे।…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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