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-राहुल लाल (कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ)भारत के उत्तर पूर्वी राज्य मेघालय की राजधानी शिलॉंग,अपने प्राकृतिक सौदर्य के कारण हमेशा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है।यही कारण है कि इसे पूर्व का स्कॉटलैंड भी कहते हैं। पहाड़ों पर बसा छोटा और खूबसूरत शहर शिलॉन्ग 31 मई से हिंसा की आग में झुलस रहा है।यहाँ सिखों और स्थानीय खासी जनजाति के बीच तनाव बढ़ गया है कि सेना भी बुलानी पड़ी।रविवार…
-बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) दुनिया के कई देशों में दिल्ली के जंतर मंतर की तरह आवाज बुलंद करने वाली जगह हैं। इन स्थानों पर लोग सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने और उसका विरोध जताने के लिए एकत्रित होते है। जैसे ट्राफलगर स्क्वायर लंदन, यूनियन स्क्वायर न्यूयॉर्क, तहरीर स्क्वायर काहिरा। जहां कोई न कोई क्रांति या बदलाव हुआ है। इनमें लंदन का ट्राफलगर स्क्वायर प्रमुख है जो विरोध…
-डा. राजेन्द्र प्रसाद शर्मासूदखोरों के दबाव में बिजली के तार को छूकर मौत को गले लगाने का मामला भले ही जयपुर का हो पर कमोबेस यह उदाहरण देश के किसी भी कोने में देखा जा सकता है। जयपुर में एशिया की सबसे बड़ी कालोनी मानसरोवर में इसी 29 मई को मुहाना के 43 वर्षीय बाबू लाल यादव ने अपने परिचित के घर से गुजर रही बिजली की लाइन के तार…
-जावेद अनीस 6 जून को मंदसौर गोलीकांड के एक साल पूरे हो चुके हैं जिसमें कृषि कर्मण अवार्ड के कई तमगे हासिल कर चुकी मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों पर गोलियां चलवाने का खिताब भी अपने नाम दर्ज करवा लिया था. तमाम कोशिशों के बाद भी मध्यप्रदेश के किसान मंदसौर गोलीकांड के जख्म को भूल नहीं पा रहे हैं. सूबे में किसान आन्दोलन एक बार फिर जोर पकड़ रहा है. किसान…
-ओम प्रकाश उनियाल(स्वतंत्र पत्रकार) न जाने कितने सालों से 'पर्यावरण बचाओ-पर्यावरण बचाओ' जैसा नारा हरेक की जुबान पर सुनने को मिल रहा है। सरकारी मशीनरी तो पर्यावरण बचाने के नाम पर जमकर पैसा बहाती रहती हैं। फिर भी हालत वही 'ढाक के तीन पात'। ऐसा नहीं कि सरकारी, गैर-सरकारी संस्थाएं व पर्यावरण मित्र कार्य नहीं कर रहे हैं। सब यथानुसार अपना-अपना दायित्व निभाते आ रहेे हैं। लेकिन समझ नहीं आता…
-रमेश सर्राफ धमोरा (स्वतंत्र पत्रकार) प्रति वर्ष दुनिया में 100 से ज्यादा देशों के लोगों द्वारा 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1972 में 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन से हुई। 5 जून 1973 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था। इस अभियान की शुरुआत लोगों के बीच में पर्यावरण के मुद्दों के बारे में…
-संजय रोकड़ेराजनीति में कभी कोई स्थायी स्टेंड़ नही होता है। राजनेता हमेशा अपनी सुविधा के अनुसार खुद को फीट करते रहते है और रहेगें। खासकर चुनावी हार-जीत में। हार और जीत का कब, किसको और क्यों श्रेय दिया जाना चाहिए यह बेहद अबुझ पहेली रही है। जैसा कि शंका थी कि कैराना की हार का ठीकरा हिंदू- मुस्लिम जैसे विवादस्पद मुद्दें पर आकर फुटेगा और हुआ भी वही। भाजपा के…
दीपक गिरकर (स्वतंत्र टिप्पणीकार) डिनर डिप्लोमेसी किसी व्यक्ति को पटाने का एक परंपरागत तरीका हैं. डिनर डिप्लोमेसी से हर व्यक्ति बचपन से ही परिचित हो जाता हैं. जब बचपन में हम देखते कि किस प्रकार अपनी माँ अपनी या अपने बच्चों की उचित-अनुचित माँग मनवाने की लिए शाम को पिताजी के घर लौटने के पूर्व ही उनका मनपसंद खाना बनाकर तैयार रखती थी और किस प्रकार उनका स्वागत करती थी.…
-सुरेन्द्र कुमार, हिमाचल प्रदेश विश्व पर्यावरण दिवस 2018 की वैश्विक मेजबानी इस वर्ष भारत ने की। इस दिवस को यादगार बनाने और वैश्विक स्तर पर अपनी समृद्ध संस्कृति की छाप छोड़ने के लिए सरकार ने नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में बीते 5 जून को प्लास्टिक मुक्त एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया। प्रदर्शनी में यूएन ने पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्राचीन भारतीय परंपरागत विधियों…
-बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) घूमना फिरना तो सभी को पसंद होता है लेकिन कुछ लोगों को खूबसूरत गार्डन और हरियाली जगहों पर जाना बेहद पसंद होता है। खूबसूरत पेड़-पौधे और फूलों के बीच घूमने का मजा ही अलग है। हरियाली और प्राकृतिक जगहें तो हर किसी को पसंद होता है। हिल स्टेशन हो या कोई प्लेस, अक्सर वहां की प्राकृतिक खूबसूरती आपका मन मोह लेती है। ऐसे…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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