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-कमलेश पांडे (वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार)अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश समेत कुछेक अन्य विश्वविद्यालयों और उनसे जुड़े अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में किसी भी तरह के दाखिले और नौकरियों में अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लोगों को आरक्षण नहीं दिया जाना नीतिगत लापरवाही है, जो इनकी प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी छद्म मानसिकता पर कई सुलगते सवाल खड़े करती है।जहां तक एएमयू का मामला है तो इस बात से सभी वाकिफ…

आत्म - कथांश

-नीरज त्यागी अगर अपने जीवन की कुछ पसंदीदा चीजों को एकत्रित करूं,तो सबसे पहली चीज जो चाहना और पाना बहुत बड़ी उपलब्धि थी, वह था दो पहिया वाहन उस समय जिस समय पैसा कमाना बहुत ही भारी होता था और एक आम आदमी की आय इतनी अधिक नहीं होती थी उस समय किसी के पास दो पहिया वाहन होना बहुत ही बड़ी बात होती थी और जिन बड़े बुजुर्गों के…
- डॉ आदित्य जैन 'बालकवि'अबोध पुत्र को पीठ से बांधकर लड़ती हुई वीरांगना पर तलवार चलाते वक्त जिनके निर्मम हाथ नहीं कांपे... वो 'अहिंसा' से डर गए ? देश खाली कर गये ? माफ कीजिएगा साहब.. इतना 'कड़वा सच' हमसे तो नहीं पचेगा। 'सच' को 'सच' कहेंगे... तो फिर हल्ला मचेगा। वैसे भी इतिहास के वास्तविक पन्ने...फट गए या फाड़ दिए गए.. इस बात पर गहरा शक है। क्योंकि आधे…
-कमलेश पांडे (वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार)दुनिया में हिंदुओं पर एक के बाद दूसरे लक्षित हमले हो रहे हैं, लेकिन हमारी क्षुद्र सियासत और उससे बनी सरकारें हाथ पर हाथ धरे तमाशबीन बनी रहती हैं! दो टूक कहें तो इसके विरुद्ध महज खानापूर्ति करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ लेती हैं जिससे हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। अमूमन पाकिस्तान, बंगलादेश, और अफगानिस्तान में जिस क्रूरता पूर्वक अल्पसंख्यक हिंदुओं…
- राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित" किशोरावस्था यानी 13 से 19 वर्ष की आयु के युवक युवतियाँ । इस अवस्था मे शारीरिक बदलाब होने लगते हैं जिनमें प्रमुख है मिज़ाज का बदलना,क्रोध की अधिकता,शराब का सेवन करना आम बात है जिनके कारण जीवन में अवसाद चिंता और अन्य भावनात्मक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अमेरिकी मनोरोग एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक अत्यधिक मानसिक रोग लगभग 14 वर्ष से को होने लगता…
-सुरेन्द्र कुमार, हिमाचल प्रदेश। 21वी सदी में हमारा संचार तंत्र इतना विकसित हो गया है कि आज दुनिया की प्रत्येक सूचनाएँ बड़ी तेजी से फेसबुक, वहाट्सएप, टवीटर इत्यादि साधनों के माध्यम से हमारे पास पहुँच रही है। फायदे व आरामदायक जीवन जीने के लिए बनाए गए इन इलेक्ट्रॉनिक साधनों में कभी ऐसी संकुचित सूचनाएँ भी विस्तारित हो जाती हैं जो देश के लिए बेहद घातक सिद्ध होती है। आज की…
ग्राम प्रधान महेश चन्द्र ने वो हर गलत काम किये, जिससे अधिक से अधिक धन-दौलत कमायी जा सके | देखते ही देखते वह करोडों का मालिक बन बैठा | जो कभी पाई - पाई को तरसता था, उसके शानौ-शोकत राजा-महाराजाओं से कम नहीं थी | उसके यहाँ तहसीलदार, जिलाधिकारी, सांसद, विधायक, दरोगा, मंत्री हाजिरी देने लगे | एक दिन अचानक से उसके क्रिया-कलाप बदल गये, अब वो साधु-संतों की सेवा…
- राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित" शिक्षक एवम साहित्यकार हमारे देश को विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा करने का सपना हर भारतीय का है। दो हज़ार बीस में भारत विकसित कैसे बने? इस हेतु मिसाइल मेन पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम साहब ने पाँच सौ एक्सपर्ट के साथ डिपार्टमेंट ऑफ साइंसेस एंड टेक्नोलॉजी के विजन दो हज़ार बीस नाम से डॉक्युमेंट तैयार किया। इसके अनुसार हमारा देश दो हज़ार बीस तक विकसित…
-ओम प्रकाश उनियाल(स्वतंत्र पत्रकार) हरेक जीव-जंतु मनुष्य की भाँति स्वतंत्रता चाहता है। प्रकृति ने उन्हें यह वरदान प्रदत्त भी किया हुआ है। लेकिन मानव उनकी स्वतंत्रता पचा नहीं पा रहा। उनके तमाम अधिकार उनसे किसी न किसी रूप में छीन रहा है। उनको अपने अधिपत्य में रखना चाहता है। जिसके कारण मनुष्य और जानवरों के बीच संघर्ष की नौबत बनी हुई है। मनुष्य तो आदिकाल से ही जीव-जंतुओं को अपनी…
- तनवीर जाफ़री संत कबीर जी फ़रमाते हैं-‘निंदक नियरे राखिए,आंगन कुटी छवाए। बिन पानी,साबुन बिना, निर्मल करे सुखाए।। अर्थात् जो हमारी निंदा करता है उसे अधिक से अधिक अपने पास ही रखना चाहिए। वह तो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बताकर हमारे स्वभाव को स्वच्छ करता है। क्या वर्तमान सत्ताधारी कबीरदास की इस वाणी को चरितार्थ कर रहे हैं? यदि हम अपने राजनैतिक व सामाजिक वातावरण में गंभीरता…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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