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-विनोद कुमार विक्की (स्वतंत्र लेखक सह व्यंग्यकार) श्रीमान जी गजब के लेखक है।जनाब लिखते कम लेकिन छपते ज्यादा है।हो गए ना आप भी हैरान। जी हाँ ये बिलकुल सच है।बंदे के पास ना तो बंगाली बाबा का कोई जंतर है और ना ही उसने पी सी सरकार की तरह जादू का क्रैश कोर्स किया है।बावजूद इसके आए दिन जनाब भंगार मेल,कबाड़ मेल,जुगाड़ मेल,बेकार मेल आदि पत्र-पत्रिकाओं में साहित्य के लिए…
-ओम प्रकाश उनियाल(स्वतंत्र पत्रकार)आज का युग सूचना तकनीक का युग है। इंटरनेट इसी युग की देन है। एक तरफ इंटरनेट ने हर काम को आसान कर दिया है तो दूसरी और इसका दुरुपयोग करने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। कुछ भी जानकारी चाहिए तो नेट पर जाएं बेबसाइट ब्राउज कीजिए और जानकारी झटपट आपके कम्प्यूटर, मोबाइल, लेपटाप पर। कितनी सरल बना दी है न जिंदगी। घर बैठे…
-अब्दुल रशीद पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय पर शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष के समापन समाहरोह में व्याख्यान देने पहुंचे थे।अपने व्याख्यान की शुरुआत में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा की"मैं यहाँ आपसे तीन चीज़ों के बारे में अपनी समझ साझा करने आया हूँ। राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति. ये तीनों सब एक दूसरे से जुड़े हैं, इन्हें अलग नहीं किया जा सकता।"इसके बाद…
-बाल मुकुंद ओझा (वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार) लंदन टावर भी अजब गजब है। नाम जरूर लंदन टावर है मगर है ब्रिटेन की महारानी का शाही महल जिसे किला भी कहा जाता है। ब्रिटेन की राजधानी लंदन के मध्य में टेम्स नदी के किनारे बने इस भव्य किले का निर्माण सन् 1078 में विलियम ने कराया था। यह किला अनेक मृत्युदंड तथा हत्याओं का साक्षी रहा है। शाही जवाहरात यहीं सुरक्षित…
'इ$फ्तार' उस प्रक्रिया का नाम है जो मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा माह-ए-रमज़ान में रखे जाने वाले रोज़े के समापन के समय अमल में लाई जाती है। सीधे शब्दों में रोज़ा अथवा व्रत खोलने को इ$फ्तार कहा जाता है। भारतवर्ष चूंकि एक धर्मनिरपेक्ष देश है इसलिए यहां मुसलमानों द्वारा कठिन से कठिन मौसम व परिस्थितियों में रोज़ा रखने वाले मुसलमानों को इ$फ्तार पार्टी दिए जाने का सैकड़ों वर्ष पुराना एक…
-निर्मल रानी हमारे देश में महिलाओं को लेकर समाज में पाया जाने वाला दोहरापन किसी से छुपा नहीं है। यह वही भारत महान है जहां कन्याओं की पूजा का प्रदर्शन किया जाता है,अनेक देवियों की पूजा होती है,उनके नाम पर कई व्रत रखे जाते हैं और अक्सर लोग 'जय माता दी' के उद्घोष करते हुए भी सुनाई देते हैं। और इसी समाज में मीडिया द्वारा कभी देश की राजधानी दिल्ली…
-डॉ प्रदीप उपाध्याय महान गीतकार शैलेन्द्र ने एक गीत लिखा था- “कल की दौलत आज की खुशियाँ,उनकी महफिल अपनी गलियाँअसली क्या है नकली क्या है पूछो दिल से मेरे।”हमारे दौर के इस गीत पर पहले तो कई दिनों तक विचार करता रहा कि इन सब बातों का असली-नकली होने से क्या वास्ता! कल की दौलत तो असली ही रही होगी और फिर आज की खुशियाँ क्या नकली हो गई हैं!…
-अब्दुल रशीदफलों के राजा आम के शौकीनों का ज़ायका इस साल थोड़ा कम मीठा रहेगा। इस साल आम के लिए मौसम का मिजाज कुछ ठीक नहीं रहा, लगातार आए तूफान, धूल भरी आंधियां और बेवक्त बारिश ने देश के सबसे बेहतर आम उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में आम उत्पादन को प्रभावित किया है।आम के लिए मौसम की बेरुखी न केवल कीमत पर असर डाला है, बल्कि आम के मिठास यानी…
-मुकेश कुमार ऋषि वर्मा हिंदी फीचर फिल्म - शूद्र अ लव स्टोरी में मेरी छोटी सी भूमिका पूर्ण हो चुकी थी | दोपहर को पैकअप हो गया और उसी दिन मैं बनारस जंक्शन पहुंच गया | यह बात उसी दिन की है जिस दिन बनारस में कैंट पुल हादसा हुआ था... | बनारस से आगरा तक का सफ़र जनरल डिब्बे में करना था | मेरी किस्मत अच्छी रही कि बनारस…
-अब्दुल रशीदप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सत्ता सम्भाले हुए चार साल पूरे हो गए। बड़े-बड़े वादों और उम्मीदों के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार "सबका साथ सबका विकास" कहती तो दिखी लेकिन जमीनी स्तर पर वैसी कामयाबी नहीं मिली जैसी आम जनता उम्मीद कर रही थी।एक कड़वा सच यह भी मौजूदा सरकार ने काम से ज्यादा काम के प्रचार पर ज्यादा ध्यान दिया और इस तरह विज्ञापन पर ख़र्च के…
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नार्थ अमेरिका में भारत की राष्ट्रीय भाषा 'हिन्दी' का पहला समाचार पत्र 'हम हिन्दुस्तानी' का शुभारंभ 31 अगस्त 2011 को न्यूयॉर्क में भारत के कौंसल जनरल अम्बैसडर प्रभु दियाल ने अपने शुभ हाथों से किया था। 'हम हिन्दुस्तानी' साप्ताहिक समाचार पत्र के शुभारंभ का यह पहला ऐसा अवसर था जब नार्थ अमेरिका में पहला हिन्दी भाषा का समाचार पत्र भारतीय-अमेरिकन्स के सुपुर्द किया जा रहा था। यह समाचार पत्र मुख्य सम्पादकजसबीर 'जे' सिंह व भावना शर्मा के आनुगत्य में पारिवारिक जिम्मेदारियों को निर्वाह करते हुए निरंतर प्रकाशित किया जा रहा है Read more....

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